
ईरान में हालात अब “सामान्य” दिखाए जा रहे हैं, लेकिन ज़मीनी सच्चाई इससे कहीं ज़्यादा सख़्त है। जिन शहरों में बीते हफ्तों हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए थे, वहां अब IRGC और सेना की भारी तैनाती है।
तेहरान, मशहद और इस्फहान जैसे बड़े शहरों की सड़कों पर टैंक, बख्तरबंद गाड़ियां और मशीनगनों से लैस ट्रक गश्त कर रहे हैं।
लोग घरों से बाहर निकल तो रहे हैं, लेकिन सिर्फ रोज़मर्रा की मजबूरी में — protest की हिम्मत फिलहाल गायब है।
Curfew Without Announcement
आधिकारिक तौर पर कर्फ्यू घोषित नहीं किया गया, लेकिन हालात undeclared emergency जैसे हैं। इंटरनेट बंद है, मोबाइल नेटवर्क सीमित है और सुरक्षा बलों को खुली छूट दी गई है। यही वजह है कि विरोध प्रदर्शनों में तेज़ गिरावट देखी जा रही है।
शव लेने का अल्टीमेटम
सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि सरकार ने मृत प्रदर्शनकारियों के परिवारों को स्पष्ट आदेश दिया है— शव ले जाइए, वरना सामूहिक कब्रों में दफन कर दिए जाएंगे।
यह संदेश सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि psychological warning भी माना जा रहा है।
Saedinia Arrest: Symbolic Strike
खामेनेई सरकार ने एक बड़ा सियासी संकेत देते हुए मशहूर Saedinia Cafes चेन के अरबपति मालिक Mohammad Saedinia को गिरफ्तार कर लिया। सरकार का आरोप है कि उन्होंने दंगाइयों को आर्थिक मदद दी। संपत्तियां फ्रीज, दंगों में हुए नुकसान की भरपाई। Elite class को चेतावनी।

युवाओं में लोकप्रिय इस ब्रांड पर कार्रवाई का मतलब साफ है — “Status या Fame किसी को नहीं बचाएगी।”
International Reaction: Condemnation Only
अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने दमन की आलोचना जरूर की है, लेकिन effective pressure फिलहाल नजर नहीं आता। खामेनेई शासन यह मानकर चल रहा है कि “Condemnation Headlines बनती है, Regime Change नहीं।”
शांति या Silence?
ईरान की सड़कों पर आज शांति नहीं, खामोशी है। Protest खत्म नहीं हुए, mute कर दिए गए हैं। Normalcy का दावा है, लेकिन background में टैंकों की आवाज़ साफ सुनाई देती है।
US हमला हुआ तो ईरान अकेला? मुस्लिम देशों की दोस्ती टेस्ट में!
